जेल में बंद आसाराम की तबियत बिगड़ी, देर रात अस्पताल लेकर पहुंची पुलिस

रिपोर्ट राजेश कुमार यादव

जोधपुर. नाबालिग से यौन शोषण मामले में जेल में सजा काट रहे आसाराम की देर रात तबियत बिगड़ गई. जोधपुर के सेंट्रल जेल में तबियत बिगड़ने के बाद जेल प्रशासन आसाराम को शहर के महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां पर आसाराम ने तीन घंटे के इलाज के दौरान पुलिसकर्मियों को प्रवचन भी दिए. वहीं आसाराम को देखने के लिए अस्पताल के बाहर आसाराम समर्थकों की भीड़ भी उमड़ पड़ी. इलाज के दौरान का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आसाराम अस्पताल के अंदर ही पुलिस वालों को प्रवचन दे रहे हैं और पुलिस ध्यान से उन्हें सुन रहे हैं.

दरसअल कल देर रात 12 बजे आसाराम की सेंट्रल जेल में तबियत बिगड़ गई. सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद जेल प्रशासन कड़ी सुरक्षा के बीच आसाराम को जेल से बाहर महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचा. उन्हें पुलिस वैन में अस्पताल पहुंचे ले जाया गया. जैसे ही आसाराम के समर्थकों को इसकी सूचना लगी, वह अस्पताल के बाहर पहुंच गए और जब तक पुलिस उन्हें दिखाने के बाद अस्पताल से ले नहीं गई, तब तक लोग वहां पर डटे रहे. बाद में जब आसाराम को ले जाने लगे तो उन्हें देखने के लिए बाहर लोग भागने लगे.

अस्पताल में चार डॉक्टरों की टीम ने उनका चेकअप किया. सीटी स्कैन भी करवाया गया, लेकिन तीन घंटे के इलाज के बाद आसाराम को वापस जेल ले जाया गया. उन्हें सांस में तकलीफ हो रही थी, इसके बाद डॉक्टरों ने उनको कुछ दवाएं दीं और सीटी स्कैन कराई गई, जांच रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं.

अस्पताल में ही प्रवचन देने लगे आसाराम
इलाज के दौरान का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आसाराम अपने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को अस्पताल के अंदर ही प्रवचन दे रहे हैं. चारों ओर पुलिस से घिरे आसाराम अस्पताल के सिटी स्कैन कक्ष में ही पुलिसकर्मियों को धर्म-कर्म का ज्ञान दे रहे हैं और पुलिस वाले उन्हें ध्यान से सुनते हुए दिखाई दे रहे हैं.

रात 3 बजे तक अस्पताल के बाहर समर्थकों का जमावड़ा

महात्मा गांधी अस्पताल में जैसे ही आसाराम की तबियत खराब होने की जानकारी आसाराम समर्थकों को मिली. वह अस्पताल के बाहर जुटने लगे. देर रात भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई. भारी सुरक्षा के बीच तीन घंटे इलाज के बाद आसाराम को पुलिस अस्पताल से वापस सेंट्रल जेल लेकर रवाना हो गई. इस दौरान आसाराम को देखने के लिए समर्थक पुलिस की गाड़ी के पीछे दौड़ने लगे. इसमें महिला और पुरुष शामिल थे.

कौन है आसाराम ?
धर्मगुरु आसाराम को जोधपुर अदालत ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार मामले में दोषी ठहराया है. अप्रैल 1941 में मौजूदा पाकिस्तान के सिंध इलाके के बेरानी गांव में पैदा हुए आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है. सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाले आसाराम का परिवार 1947 में विभाजन के बाद भारत के अहमदाबाद शहर में आ बसा. साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया. बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा. 1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई थी.

कैसे फैला साम्राज्य?
यहां से शुरू हुआ आसाराम का आध्यात्मिक प्रोजेक्ट धीरे- धीरे गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फ़ैल गया. शुरुआत में गुजरात के ग्रामीण इलाक़ों से आने वाले ग़रीब, पिछड़े और आदिवासी समूहों को अपने ‘प्रवचनों, देसी दवाइयों और भजन कीर्तन’ की तिकड़ी परोस कर लुभाने वाले आसाराम का प्रभाव धीरे-धीरे राज्य के शहरी मध्यवर्गीय इलाक़ों में भी बढ़ने लगा.

दुनियाभर में चार करोड़ अनुयायी
शुरुआती सालों में प्रवचन के बाद प्रसाद के नाम पर वितरित किए जाने वाले मुफ़्त भोजन ने भी आसाराम के ‘भक्तों’ की संख्या को तेज़ी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आसाराम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आज दुनिया भर में उनके चार करोड़ अनुयायी हैं. आने वाले दशकों में आसाराम ने अपने बेटे नारायण साईं के साथ मिलकर देश विदेश में फैले अपने 400 आश्रमों का साम्राज्य खड़ा कर लिया.

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