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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से क्या फेल हुई भाजपा की रणनीति?

राजेश कुमार यादव की कलम से
सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक मरियादा बचाने के लिए जो निर्णय 26 नवम्बर को सुबह सुनाया उससे घबड़ाकर तीन दिन पहले बनी महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस की सरकार फ्लोर टैस्ट के पहले धराशाई हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्यपाल तुरंत प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करें । प्रोटेम स्पीकर ही निर्वाचित विधायकों को 27 नवम्बर को 11बजे से 5 बजे तक शपथ दिलाएं । इसके तुरंत बाद शक्ति परिषण हो । कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि मतदान गुप्त नहीं होगा । फ्लोर टैस्ट की काय॔ वाही का सीधा प्रसारण भी होगा । कोर्ट के इस शख्त आदेश से भाजपा खेमा घबड़ा गया, और किसी प्रकार की गुंजाइश फ्लोर टैस्ट में न देख कर,आखिर केन्द्रीय नेतृत्व को बैठक कर फैसला लेना पड़ा कि फडणवीस को स्तीफा देने के लिए कह दिया जाए ? उधर एन सी पी से बगावत कर भाजपा खेमें में पहुंचे अजीत पवार पर पार्टी व पारिवारिक जनों के भारी दबाव से चलते वह टूट कर अपना स्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया और पुनः एनसीपी में आने से भाजपा के अरमानो पर पानी फिर गया । इस घटनाक्रम के बाद जब कोई भी उम्मीद सरकार बचाने के लिए नहीं बची तो फडणवीस ने भी अपना स्तीफा राज्य पाल को सौंप दिया । इसके बाद शाम को शिवसेना,एनसीपी,कांग्रेस ने बैठक कर उद्धव ठाकरे को अपना नेता चुनाव लिया । तीनों दलों का समर्थन पत्र लेकर ठाकरे राजभवन पहुंच कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया ।
महाराष्ट्र में सरकार बनाने का विवाद इतना लम्बा खीचना लगता है कि राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने में असफल हुए ?
शिवसेना,एनसीपी,कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने की सहमत होने और इसकी सार्वजनिक घोषणा मीडिया के जरिये पूरे देश को हो जाने के बाद रातों-रात राष्ट्रपति शासन खत्म करने के लिए केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक कर और सुबह ही बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के राज्यपाल कोश्यारी ने एक कमरे में देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और एनसीपी से बगावत करके आए अजीत पवार को उप-मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी । जो लोकतांत्रिक आचरण की मर्यादा को तार -तार करने वाला था ? हालांकि पहले लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अजीत पवार बगैर शरद पवार की सहमत से गए होगें । लेकिन इस बात को पवार ने बिल्कुल गलत साबित कर उनके आलोचकों को अचम्भे में डाल दिया है । पवार ने साबित कर दिया है कि ढलती उम्र के बाद भी लोगों को जोड़े रखने में उनको महारत हासिल है ।
महाराष्ट्र में भाजपा की इस राजनैतिक पराजय के बाद लगता है अब उसके पास झूठ,प्रपंच के शिवा कुछ भी नहीं है । यह सत्ता प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं ? महाराष्ट्र में सबसे बड़े दल की दुहाई देने वाले यह क्यो भूल जाते हैं कि गोवा,मणिपुर में चुनाव के बाद सबसे बड़ा दल कौन था लेकिन सरकार बीजेपी ने बनाई ? तब सिद्धान्त की दुहाई क्यो नही दी गई? कर्नाटक के मुख्यमंत्री किस भ्रष्टाचार में जेल गए थे अब भाजपा के मुख्यमंत्री है ,महाराष्ट्र में चुनाव के पहले अजीत पवार को करोड़ों के भ्रष्टाचार में जेल भेज रहे थे लेकिन सत्ता के लिए उन्हे उप मुख्यमंत्री की शपथ दिलाकर भ्रष्टाचार की फाइल बंद कर दी, हरियाणा में कैसा आद॔श पेश किया सरकार बनाने के लिए भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल की हवा खा रहे चौटाला को बाहर कर उनके बेटे की पार्टी का समर्थन लेकर सरकार बना ली । देश भाजपा की चाल,चरित्र,और उनकी नैतिकता को समझ गया है ? । 2019 के लोकसभा के चुनाव में भले ही भाजपा ने बड़ी जीत हासिल कर ली हो लेकिन 2019 जाते -जाते राजस्थान,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,पंजाब को गंवाने के बाद देश की आर्थिक राजधानी कहें जाने वाले महाराष्ट्र भी भाजपा के हाथ से निकल गया है । /

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