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राजनीति की नीव के पत्थर का अपमान , पत्रकारो को आमंत्रित कर नही चिन्हित हुई पत्रकार दीर्घा

डा प्रणय तिवारी, अपराधशास्त्री एवं सोशल एक्टिविस्ट

ब्योहारी :- विचार तो यह किया गया था कि इस बार का दशहरा का मैदान अपवादो से रहित होता , परंतु यहा तो जिनके सामने आने को शासन प्रशासन आतुर रहती है , नेता आतुर रहते है , अपनी जान जोखिम मे डालकर चुनाव सम्पन्न से लेकर , सोते हुए अधिकारियो को रात मे जगाते है , नगर पालिका ब्योहारी ने नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन करते हुए कुछ ऐसा गलत किया है जिससे बुद्धिजीवी प्रेस मीडिया कभी नही सहन करेगा .

न्यूज नेशन के सवाल पर बेतुका उत्तर:- जब यह बात एस.सी.ओ. को दी गई तो मैडम दीपशिखा के प्रश्न पर सी.एम.ओ. ने उत्तर दिया कि पार्षद , दीर्घा थी और विधायक के पीछे कुछ कुर्सिया पत्रकारो हेतु लगवाई गई थी परंतु , चिन्हित रहा हो ना रहा हो , मैनेजमेण्ट वाले जाने .
पत्रकार सामने होता है :- इन्हे इतना तो मालुम होना चाहिए कि देश की गुलामी से पहले की नीव पत्रकारिता की थी , जो फ्रन्ट मे बैठे थे उनमे कई सामान्य नागरिक भी थे , परंतु लगता है किसी बी.एस.एफ. के जवान को तैनात किया फिर भी अव्यवस्था , बतला तो दे वो रजिस्टर जिसमे पत्रकारो ने गोपनीयता से हस्ताक्छर किए हो.
भाई ये क्या बात हुई चुनाव आए तो पत्रकार आगे और निकल जाए तो , नदी सेरावत मौर, हमारे जैसे कई पत्रकार ऐसे है जो अपमान पर धरती आसमान एक कर दे .

प्राथमिक चिकित्सा भी नही :- जहा संभावना भारी भीड की होती है वहा प्राथमिक चिकित्सा ईकाई भी होनी चाहिए जो नही है, इतनी डस्ट की दमा का मरीज वही मर जाता , क्या फील्ड को डस्टमुक्त बनाने के लिए कोई कार्य किया .
महापंडित रावण के बारे मे :- रावण के पुतले मे इस बार जनेऊ का कोई अता पता नही था , उल्टे कहा जा रहा था जनेऊ वस्त्र के अंदर होता है बाहर नही , याद रखे त्रेता युग मे अंगवस्त्र ही होते थे जिससे जनेऊ झलकती थी .
उस रावण का संहार तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम प्रभु की लीला थी , जिससे विद्या ग्रहण करने लखनलाल प्रभु को पैरो की ओर आना पडा था रावण के अंतिम पलो मे.

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